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  • प्रयागराज की शुरुआत चाय से होती है और कुछ मिले या ना मिले 😍😍😍#prayagrajkumbh #prayagraj #allahabad #prayag
  • प्रयागराज की शुरुआत चाय से होती है और कुछ मिले या ना मिले 😍😍😍 #prayagrajkumbh #prayagraj #allahabad #prayag
  • 39 0 6 hours ago
  • ●Prayagraj, 2019|According to recent report from Anti- Slavery Organization (www.antislavery.org)- "Brick kiln moulders are paid per piece of brick made and usually as a family, rather than each worker paid individually per day or month, with only the male being paid, whilst women of family not getting get paid atall.
The rate paid per piece of brick made is often below the minimum wage, and well below what a worker would earn if they were paid minimum wages on a time based system.This system of payment also encourages child labour:  in order to make at least minimum wages, families at brick kiln get their children to help them make more bricks"
Few days back I was doing a documentation of life of labourers in prayagraj. Then i came across the idea to cover brick kilns, I thought it will take me just one evening to get to understand and see all the making process of bricks but what got me shocked and stunned is - LIFE OF WORKERS AND PEOPLE WHO ARE LIVING AROUND BRICK KILNS, Women who are working along side of their husband and brothers and other family members at kilns, children who are wrapped at the back of thier mothers, children who are playing in dirt and waiting for their parrents to finish their work and come home and give them something to eat.

So, at the end, i am not going to state facts about what are the things they are living with or conditions and diseases ther are dealing with right now, for that, there are hundreds of reportage and articles on them, Go! take a look by yourself. 
All i want to ask is- Does anyone, any single life deserves to live in that condition? 
Does any child deserves to sleep everynight and lay their head at ground full of unhygiene and dust , in that very poor condition? 
Does they deserves to drink the unhygienic dirty water, and live in place without any basic amenities of daily life?
Does they deserves to live their whole life without their basic rights ?
Now the real thing to find out is not that what is the answer  to these questions?
Rather it is that- who are we asking to? And who will answer them? 
#brickkilns #indianbrickkiln
#natgeoyourshot #maibhisadakchap #ReportageSpotlight
#indiaphotostory
  • ●Prayagraj, 2019|According to recent report from Anti- Slavery Organization (www.antislavery.org)- "Brick kiln moulders are paid per piece of brick made and usually as a family, rather than each worker paid individually per day or month, with only the male being paid, whilst women of family not getting get paid atall.
    The rate paid per piece of brick made is often below the minimum wage, and well below what a worker would earn if they were paid minimum wages on a time based system.This system of payment also encourages child labour: in order to make at least minimum wages, families at brick kiln get their children to help them make more bricks"
    Few days back I was doing a documentation of life of labourers in prayagraj. Then i came across the idea to cover brick kilns, I thought it will take me just one evening to get to understand and see all the making process of bricks but what got me shocked and stunned is - LIFE OF WORKERS AND PEOPLE WHO ARE LIVING AROUND BRICK KILNS, Women who are working along side of their husband and brothers and other family members at kilns, children who are wrapped at the back of thier mothers, children who are playing in dirt and waiting for their parrents to finish their work and come home and give them something to eat.

    So, at the end, i am not going to state facts about what are the things they are living with or conditions and diseases ther are dealing with right now, for that, there are hundreds of reportage and articles on them, Go! take a look by yourself.
    All i want to ask is- Does anyone, any single life deserves to live in that condition?
    Does any child deserves to sleep everynight and lay their head at ground full of unhygiene and dust , in that very poor condition?
    Does they deserves to drink the unhygienic dirty water, and live in place without any basic amenities of daily life?
    Does they deserves to live their whole life without their basic rights ?
    Now the real thing to find out is not that what is the answer to these questions?
    Rather it is that- who are we asking to? And who will answer them?
    #brickkilns #indianbrickkiln
    #natgeoyourshot #maibhisadakchap #ReportageSpotlight
    #indiaphotostory
  • 98 15 18 July, 2019
  • दिव्य और विहंगम कुम्भ के बाद इस बार माघ मेला भी अद्भुत बनाने की तैयारी है। माघ मेले में मिनी कुम्भ की झलक दिखाने के लिए विभागों ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है। पर्यटन विभाग, संस्कृति मंत्रालय और लोक निर्माण विभाग के साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर पर तैयारी की है।
पर्यटन विभाग की की ओर से इस माघ मेले में टेंट सिटी निर्माण किया जाएगा। हालांकि इसे कुम्भ की तरह बड़ा नहीं बनाया जाएगा लेकिन कॉलोनी का निर्माण परेड क्षेत्र में किया जाएगा। इसका बारिश के बाद टेंडर जारी किया जाएगा। साथ ही प्रचार-प्रसार भी होगा। इसके साथ ही संस्कृति ग्राम भी बनाया जाएगा। पूरे मेला क्षेत्र में इस बार एलईडी ही लगाई जाएगी। इसके साथ ही इस बार माघ मेले में हर जगह सोक पिट शौचालय लगाए जाएंगे। कहीं पर भी 2017 के माघ मेले की तर्ज पुराने पैटर्न के शौचालय का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। कुम्भ मेले में स्वच्छता के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम आ चुका है। ऐसे में इस बार पूरी तरह से फोकस स्वच्छता पर रहेगा। शौचालयों की संख्या भीड़ के अनुपात में अपेक्षाकृत कम रखी जाएगी। मेला क्षेत्र में हर जगह रामायण और पौराणिक महत्व की चौपाइयों के बोर्ड भी लगाए जाएंगे। अफसरों का कहना है कि हमारा प्रयास है कि इस माघ मेले में मिनी कुम्भ की झलक दिखाई दे। अब तक माघ मेले में पांच पांटून पुलों का निर्माण किया जाता था। इस बार सात पांटून पुल बनाने की योजना है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के सचिव विजय किरण आनंद ने बताया कि हम इस बार व्यवस्थाएं दुरुस्त रखेंगे। हमारा प्रयास है कि प्रमुख चीजों को इस बार रखा जाए।
#prayagrajexpress #prayagraj_official
#prayagraj #prayagrajlifestyle #prayagism
#streetsofprayagraj #allahabaddiaries #allahabadnetworking #allahabad #prayagrajkumbh
  • दिव्य और विहंगम कुम्भ के बाद इस बार माघ मेला भी अद्भुत बनाने की तैयारी है। माघ मेले में मिनी कुम्भ की झलक दिखाने के लिए विभागों ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है। पर्यटन विभाग, संस्कृति मंत्रालय और लोक निर्माण विभाग के साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर पर तैयारी की है।
    पर्यटन विभाग की की ओर से इस माघ मेले में टेंट सिटी निर्माण किया जाएगा। हालांकि इसे कुम्भ की तरह बड़ा नहीं बनाया जाएगा लेकिन कॉलोनी का निर्माण परेड क्षेत्र में किया जाएगा। इसका बारिश के बाद टेंडर जारी किया जाएगा। साथ ही प्रचार-प्रसार भी होगा। इसके साथ ही संस्कृति ग्राम भी बनाया जाएगा। पूरे मेला क्षेत्र में इस बार एलईडी ही लगाई जाएगी। इसके साथ ही इस बार माघ मेले में हर जगह सोक पिट शौचालय लगाए जाएंगे। कहीं पर भी 2017 के माघ मेले की तर्ज पुराने पैटर्न के शौचालय का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। कुम्भ मेले में स्वच्छता के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम आ चुका है। ऐसे में इस बार पूरी तरह से फोकस स्वच्छता पर रहेगा। शौचालयों की संख्या भीड़ के अनुपात में अपेक्षाकृत कम रखी जाएगी। मेला क्षेत्र में हर जगह रामायण और पौराणिक महत्व की चौपाइयों के बोर्ड भी लगाए जाएंगे। अफसरों का कहना है कि हमारा प्रयास है कि इस माघ मेले में मिनी कुम्भ की झलक दिखाई दे। अब तक माघ मेले में पांच पांटून पुलों का निर्माण किया जाता था। इस बार सात पांटून पुल बनाने की योजना है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के सचिव विजय किरण आनंद ने बताया कि हम इस बार व्यवस्थाएं दुरुस्त रखेंगे। हमारा प्रयास है कि प्रमुख चीजों को इस बार रखा जाए।
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  • 32 0 16 July, 2019
  • प्रयागराज किले में मूल अक्षयवट के दर्शन अब श्रद्धालुओं को सोमवार तक ही होंगे। अक्षयवट को बारिश के एक महीने के लिए 16 जुलाई से बंद किया जाएगा। इस दौरान सेना किले में अपने काम करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ पिछले महीने लखनऊ में हुई बैठक में 15 जुलाई तक अक्षयवट को दर्शन के लिए खोलने की मौखिक सहमति बनी थी। अब तक सेना की ओर से आगे की तारीख नहीं तय की गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि अक्षयवट में 15 जुलाई तक ही दर्शन होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद अक्षयवट को इस साल कुम्भ मेले के ठीक पहले 10 जनवरी को आम श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। पहले 31 मार्च तक इसे दर्शन के लिए खोलने की बात कही गई थी लेकिन बाद में सरकार के हस्तक्षेप में पहले 30 जून और बाद में 15 जुलाई तक अक्षयवट को दर्शन के लिए खोला गया था। पांच मार्च को प्रयागराज में कुम्भ के औपचारिक समापन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्षयवट साल के 11 महीने खुलने की बात कही थी। तभी यह तय हो गया था कि बारिश के एक महीने इसे आम श्रद्धालुओं के लिए बंद किया जाएगा। अब 15 जुलाई दर्शन की आखिरी तारीख होगी। #prayagrajexpress #prayagraj #prayagraj_official #prayagism
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  • 56 0 15 July, 2019
  • ●Prayagraj, 2019|According to recent report from Anti- Slavery Organization (www.antislavery.org)- "Brick kiln moulders are paid per piece of brick made and usually as a family, rather than each worker paid individually per day or month, with only the male being paid, whilst women of family not getting get paid atall.
The rate paid per piece of brick made is often below the minimum wage, and well below what a worker would earn if they were paid minimum wages on a time based system.This system of payment also encourages child labour:  in order to make at least minimum wages, families at brick kiln get their children to help them make more bricks"
Few days back I was doing a documentation of life of labourers in prayagraj. Then i came across the idea to cover brick kilns, I thought it will take me just one evening to get to understand and see all the making process of bricks but what got me shocked and stunned is - LIFE OF WORKERS AND PEOPLE WHO ARE LIVING AROUND BRICK KILNS, Women who are working along side of their husband and brothers and other family members at kilns, children who are wrapped at the back of thier mothers, children who are playing in dirt and waiting for their parrents to finish their work and come home and give them something to eat.

So, at the end, i am not going to state facts about what are the things they are living with or conditions and diseases ther are dealing with right now, for that, there are hundreds of reportage and articles on them, Go! take a look by yourself. 
All i want to ask is- Does anyone, any single life deserves to live in that condition? 
Does any child deserves to sleep everynight and lay their head at ground full of unhygiene and dust , in that very poor condition? 
Does they deserves to drink the unhygienic dirty water, and live in place without any basic amenities of daily life?
Does they deserves to live their whole life without their basic rights ?
Now the real thing to find out is not that what is the answer  to these questions?
Rather it is that- who are we asking to? And who will answer them? 
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  • ●Prayagraj, 2019|According to recent report from Anti- Slavery Organization (www.antislavery.org)- "Brick kiln moulders are paid per piece of brick made and usually as a family, rather than each worker paid individually per day or month, with only the male being paid, whilst women of family not getting get paid atall.
    The rate paid per piece of brick made is often below the minimum wage, and well below what a worker would earn if they were paid minimum wages on a time based system.This system of payment also encourages child labour: in order to make at least minimum wages, families at brick kiln get their children to help them make more bricks"
    Few days back I was doing a documentation of life of labourers in prayagraj. Then i came across the idea to cover brick kilns, I thought it will take me just one evening to get to understand and see all the making process of bricks but what got me shocked and stunned is - LIFE OF WORKERS AND PEOPLE WHO ARE LIVING AROUND BRICK KILNS, Women who are working along side of their husband and brothers and other family members at kilns, children who are wrapped at the back of thier mothers, children who are playing in dirt and waiting for their parrents to finish their work and come home and give them something to eat.

    So, at the end, i am not going to state facts about what are the things they are living with or conditions and diseases ther are dealing with right now, for that, there are hundreds of reportage and articles on them, Go! take a look by yourself.
    All i want to ask is- Does anyone, any single life deserves to live in that condition?
    Does any child deserves to sleep everynight and lay their head at ground full of unhygiene and dust , in that very poor condition?
    Does they deserves to drink the unhygienic dirty water, and live in place without any basic amenities of daily life?
    Does they deserves to live their whole life without their basic rights ?
    Now the real thing to find out is not that what is the answer to these questions?
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  • 152 24 14 July, 2019